बे - वजह


हमेशा से श्रोंताओं की इच्छा होती है कुछ अच्छा सुनने की | आज के कानफोडू संगीत के दौर में शब्द गुम हो गए है, और जो हैं उनमें नीरसता ही नीरसता है| ऐसे में श्रोंताओं में अरुचि का पैदा होना स्वाभाविक है| विगत कई वर्षों में, कुछ एक एल्बम को छोड़कर, हिंदी में अच्छे एल्बमों का अभाव रहा है| इस अभाव को देखते हुए सुन्दर गजलों/गीतों का गुलदस्ता श्रोंताओं के लिए तैय्यार किया गया है| प्रयोग रूप में यह एल्बम “बे-वजह” नाम से सार्थक हुई है|